भूगोल (GEOGRAPHY ) CHAPTER-1 , सभी EXAMS के लिए…

 भूगोल (GEOGRAPHY ) कक्षा - 6th , सभी EXAMS के लिए… 




You have lot of Questions in your mind ? how can I achieve my Goal?

आपके दिमाग में यह सवाल बहुत परेशान करता होगा की आखिर सरकारी नौकरी के लिए तैयारी  कहा  से करे ?

 
अपने  सपने  को पूरा कैसे करे ? 


यह सवाल न जाने कितने  students के मन में आता होगा ?


आप में से कई स्टूडेंट्स ऐसे है जिन्हे फाइनेंसियल problem का सामना करना पर रहा होगा।  


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अभी हम भूगोल के first chapter का बेसिक को समझेंगे।  यह नोट्स आपके लिए बहुत important है :


class : 6th , chapter -1 (geography)


हम इन सभी बिन्दुओ को  एक -एक कर के explain करेंगे ?




1. पूर्ण चन्द्रमा वाली रात  या पूर्णिमा 

:- आप पूरा चाँद को लगभग एक महीने में एक बार देख  सकते हैं।  यह पूर्ण चन्द्रमा वाली रात या पूर्णिमा होती 

    हैं।  


2. नये चन्द्रमा की रात्रि या अमावस्या 

:- पंद्रह दिन के बाद हम पूरा चन्द्रमा को नहीं देख सकते है।  यह नए चन्द्रमा की रात्रि या अमावस्या होती है। 

        


3. खगोलीय पिण्ड 

:- सूर्य , चन्द्रमा , तथा वे सभी वस्तुएँ जो रात के समय आसमान में चमकती हैं , उन्हें खगोलीय पिंड कहते हैं। 

         


4. तारा 

:- कुछ खगोलीय पिंड बड़े आकार वाले तथा गर्म होते हैं।  

:- ये गैसों से बने होते हैं। 

:- इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है, जिसे वे बहुत बड़ी मात्रा में उतसर्जित करते हैं। 

 :- इन खगोलीय पिंडो को तारा कहते हैं। 

:- सूर्य भी एक तारा हैं। 

       

5. नक्षत्र मण्डल 

:- रात्रि में आसमान की  ओर देखते समय आप तारों  के विभिन (अलग -अलग ) समूहों द्वारा बनाई गई  विविध

   (अलग -अलग ) आकृतियों को देख सकते हैं। 

:- ये नक्षत्रमंडल  कहलाते हैं। 

     


6.  अर्सा मेजर या बिग बीयर 

:-  एक तरह का नक्षत्रमंडल हैं।  

    


7. सप्तऋषि 

:- यह बहुत आसानी से पहचान में आने वाला नक्षत्रमंडल हैं। 

:-  सप्तऋषि ( सप्त - सात , ऋषि - संत

:- यह सात तारो का समूह है, जो कि  नक्षत्रमंडल अर्सा  मेजर का भाग  हैं। 



8. ध्रुव तारा 

:- यह आसमान के उत्तर दिशा में रहता हैं। 

:- यह आसमान में एक ही जगह पर रहता हैं।  यह रात्रि में उत्तर दिशा को बताता हैं। 

:- हम  सप्तऋषि की सहायता से ध्रुव तारा की स्तिथि को जान सकते हैं।  




9. प्लेनेट (planet ): 

:- ग्रह जिन्हे अंग्रेजी में प्लेनेट (planet ) कहते हैं ग्रीक भाषा के प्लेनेटाइ (planetai ) शब्द से बना है 

     जिसकाअर्थ  होता है परिभ्रमक अर्थात  चारो ओर घूमने वाले। 




10. पृथ्वी का प्रकाश और उष्मा 

:- पृथ्वी, जिस पर हम रहते है, एक ग्रह हैं।  यह अपना सम्पूर्ण प्रकाश एवं ऊष्मा सूर्य से प्राप्त करती है जो पृथ्वी 

    के सबसे नजदीक का तारा है। 

11. छल्ले 

:- बृहस्पति , शनि  तथा यूरेनस के चारो ओर छल्ले हैं।  

:-  ये छल्ले  विभिन्न पदार्थो के असंख्य छोटे - छोटे पिंडो से बनी पट्टियाँ हैं। 

:- पृथ्वी से इन छल्लो को शक्तिशाली दूरबीन से देखा जा सकता हैं।  


12. आंतरिक ग्रह और बाहय ग्रह 

:- आंतरिक ग्रह ; यह सूर्य के बहुत नजदीक हैं।  ये चट्टानों से बने हैं। 

                         : बुध (Mercury ), शुक्र (Venus ), पृथ्वी (Earth ) तथा मंगल (Mars ). 

:- बाह्य ग्रह : यह सूर्य से बहुत दूर हैंतथा बहुत बड़े आकार के हैं।  ये गैस और तरल पदार्थो से बने हैं। 

                  : बृहस्पति (Jupiter ), शनि ( Saturn ), यूरेनस (Uranus ) तथा नेप्चयून (Neptune ). 



13. ग्रह 

:- कुछ खगोलीय पिंडो में अपना प्रकाश एवं ऊर्जा नहीं होती हैं।  वे तारो के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। 

   ऐसे पिंड ग्रह कहलाते हैं।  




14. छुद्र ग्रह पट्टी 

:- आंतरिक तथा बाह्य ग्रह के बीच की पट्टी को क्षुद्र ग्रह पट्टी  कहते हैं। 



15. ग्रह दूरी से 

:- सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रह हैं : बुध ग्रह, शुक्र ग्रह, पृथ्वी ग्रह, मंगल ग्रह,  बृहस्पति ग्रह, शनि ग्रह, यूरेनस

                                                    ग्रह तथा  नेप्चयून। 



  

16. ग्रह आकार से 

:- Mercury, Mars, Venus, Earth, Neptune, Uranus, Saturn and Jupiter.


17. बौना ग्रह 

:- अभी तक प्लूटो भी एक ग्रह माना जाता था।  परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन ने अपनी बैठक (अगस्त

   2006 ) में यह निर्णय लिया कि कुछ समय पहले खोजे गए अन्य खगोलीय पिंड ( 2003 UB313,   सिरस ),

  तथा प्लूटो  'बौने ग्रह ' कहे जा सकते हैं। 


18. सौरमण्डल 

:-  सूर्य ,आठ ग्रह , उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड , जैसे क्षुद्र ग्रह एवं उल्कापिंड मिलकर सौरमंडल 

    का निर्माण करते हैं। 

:- उसे हम सौर परिवार का नाम देते हैं , जिसका मुखिया सूर्य  हैं। 

:- पौराणिक रोमन कहानियो में ' सोल ' सूर्य देवता को कहा जाता है।  'सौर ' शब्द का अर्थ है , सूर्य से 

    संबंधित।  इसलिए सूर्य के परिवार को 'सौरमंडल ' ( SOLAR SYSTEM )कहा जाता है। 



19. आर्यभट्ट 

:- आर्यभट्ट प्राचीन भारत के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे। 


20. सूर्य 

:- सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्तिथ हैं। 

:- यह बहुत बड़ा  हैं एवं अत्यधिक गर्म गैसों से बना है। 

:- इसका खिंचाव बल इससे सौरमंडल को खींचे रखता हैं। 

:- सूर्य , सौरमंडल के लिए  प्रकाश एवं उष्मा   का एक मात्र स्रोत हैं। 

:- सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। 






21. कक्षा 

:- सौरमंडल के सभी आठ ग्रह एक निश्चित पथ पर

सूर्य
का चक्कर लगाते हैं।  ये रास्ते दीर्घवृत्ताकार में फैले हुए 

    हैं, इन्ही को कक्षा कहते हैं। 

22. जुड़वाँ ग्रह 

:- शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह माना जाता हैं , क्यूंकि इसका आकार एवं आकृति लगभग पृथ्वी के हे 

    समान  हैं। 




23. प्लूटो

:- अभी तक प्लूटो को भी ग्रह माना जाता था , परन्तु अन्तर्राष्टीय खगोलीय संगठन ने अपनी          

बैठक  (अगस्त 2006 ) में ग्रह की सूचि से निकाल  दिया।  अब इन्हे हम बौना ग्रह कह सकते हैं।  


24. सिरस 

:- अभी तक सिरस  भी ग्रह माना जाता था , परन्तु अन्तर्राष्टीय खगोलीय संगठन ने अपनी बैठक 

   (अगस्त 2006 ) में ग्रह की सूचि से निकाल  दिया।  अब इन्हे हम बौना ग्रह कह सकते हैं।


25. अंतराष्टीय 

:- अन्तर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन ने अपनी बैठक (अगस्त

   2006 ) में यह निर्णय लिया कि कुछ समय पहले खोजे गए अन्य खगोलीय पिंड ( 2003 UB313,   सिरस ),

  तथा प्लूटो को  'बौने ग्रह ' कहे जा सकते हैं। 


26. खगोलशास्त्री 

:-खगोलीय पिंडो एवं उनकी गति के संबंध में अध्ययन करने वालो को खगोलशास्त्री कहते हैं। 


27. भू - आभ

:-  पृथ्वी ध्रुवो के पास थोड़ी चपटी हैं , यही कारन है की इसके आकार को भू -आभ कहा जाता 

     हैं। 


28 प्रकाश की गति 

:- प्रकश की गति लगभग 300000 किमी. /प्रति. सेकेंड हैं। 


29. नील  आर्मस्ट्रांग 

:- नील आर्मस्ट्रांग ऐसे पहले व्यक्ति थे  जिन्होंने ( 21 जुलाई 1969 ) को  चाँद पर पहला कदम रखा। 




30. चन्द्रमा तथा पृथ्वी 

:- चन्द्रमा पृथ्वी एक मात्र उपग्रह हैं।  इनका व्यास पृथ्वी के व्यास का केवल एक चौथाई है। 

:- चन्द्रमा हमसे लगभग 3,84400 किलोमीटर दूर हैं।





31. उपग्रह 

:- पृथ्वी पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =1 हैं 

:-  मंगल  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =02  हैं 

:-  बृहस्पति  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =16  हैं 

:- शनि  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =30  से अधिक हैं 

:- यूरेनस  चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =लगभग 17 हैं

:- नेप्चयून  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =08 हैं 


32. मानव निर्मित उपग्रह 

:- यह एक कृत्रिम पिंड है।  यह वैज्ञानिक के द्वारा बनाया गया है , जिसका उपयोग ब्रह्माण्ड के बारे में जानकारी      

   प्राप्त करने एवं पृथ्वी पर संचार माध्यम  लिए किया जाता है।  

:- अंतिरक्ष में उपस्तिथ कुछ भारतीय उपग्रह है. - इनसेट , आई. आर. एस. , एडुसैट , इत्यादि। 




33. छुद्र ग्रह 

:- तारो , ग्रहो एवं उपग्रहो के अतिरिक्त (नजदीक ) ,असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारो ओर  चक्कर लगाते हैं।  

    इन्ही पिंडो को छुद्र ग्रह कहते हैं। 

34. उल्कापिण्ड 

:- सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरो के छोटे -छोटे टुकड़ो को उल्कापिंड कहते हैं। 

35. आकाशगंगा 

:- यह लाखो तारो का समूह है।  यह पट्टी आकाशगंगा (मिल्की वे ) हैं।  प्राचीन भारत में इसकी कल्पना 

  आकाश में  प्रकाश की एक बहती नदी से की गयी थी।  इस प्रकार इसका नाम आकाशगंगा  पड़ा था।  

:- आकाशगंगा करोड़ो तारो , बादलो तथा गैसों की एक प्रणाली हैं। 

36. ब्रह्माण्ड 

:- लाखो आकाशगंगाएँ  मिलकर ब्रह्माण्ड का निर्माण करते हैं। 


37. चाँद पर  जाने वाले  भारतीय व्यक्ति 

:- अबतक भारत की और से कोई भी व्यक्ति चाँद पर नहीं गया है लेकिन अंतरिक्ष पर जाने वाले व्यक्ति है -राकेश 

    शर्मा हैं। 



38. भारतीय एयर स्पेस एजेंसी का नाम 

:- एजेंसी का नाम है - ISRO ( INDIAN SPACE RESEARCH ORGANISATION)




39 भारतीय निर्मित उपग्रह 

:- अंतिरक्ष में उपस्तिथ कुछ भारतीय उपग्रह है. - इनसेट , आई. आर. एस. , एडुसैट , इत्यादि। 



40. ग्रहो पर चन्द्रमा की संख्या 

 

:- पृथ्वी पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =1 हैं 

:-  मंगल  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =02  हैं 

:-  बृहस्पति  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =16  हैं 

:- शनि  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =30  से अधिक हैं 

:- यूरेनस  चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =लगभग 17 हैं

:- नेप्चयून  पर चन्द्रमा (उपग्रह ) की संख्या =08 हैं 



COMING SOON …OBJECTIVE QUESTIONS OF THIS CHAPTER





































































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